नई दिल्ली: व्यक्तित्व को निखारने में कद यानी लंबाई की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी लंबाई अच्छी हो, लेकिन आनुवंशिकी के साथ-साथ पोषण, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली जैसे कई कारक भी इसके विकास को प्रभावित करते हैं।
केवल आनुवंशिकी ही नहीं है लंबाई का आधार
आमतौर पर माना जाता है कि किसी व्यक्ति की लंबाई पूरी तरह आनुवंशिकी पर निर्भर करती है। हालांकि, यह लंबाई को प्रभावित करने वाले कई कारकों में से सिर्फ एक है। शरीर को पर्याप्त विटामिन डी, विटामिन बी1, प्रोटीन और कैल्शियम मिलने के साथ नियमित व्यायाम और संतुलित आहार भी हड्डियों तथा मांसपेशियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिटनेस और स्ट्रेचिंग का महत्व
नियमित व्यायाम शरीर को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करता है। सही फिटनेस रूटीन से मांसपेशियों को टोन करने, शरीर की मुद्रा (पोश्चर) बेहतर करने और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी शरीर के लचीलेपन और पोश्चर को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती हैं।
किशोरावस्था के बाद लंबाई को लेकर क्या है सच्चाई?
किशोरावस्था के दौरान हड्डियों का विकास तेजी से होता है। आम तौर पर हड्डियों की लंबाई बढ़ने की प्रक्रिया ग्रोथ प्लेट्स के बंद होने के साथ रुक जाती है। यह उम्र व्यक्ति के लिंग और जैविक विकास के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किशोरावस्था के बाद स्ट्रेचिंग से हड्डियों की लंबाई कई इंच बढ़ना वैज्ञानिक रूप से निश्चित नहीं माना जा सकता। हालांकि, नियमित स्ट्रेचिंग और बेहतर पोश्चर से व्यक्ति अधिक सीधा और लंबा दिखाई दे सकता है।
सही खानपान और व्यायाम पर दें ध्यान
लंबाई और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना फायदेमंद हो सकता है। खासकर बच्चों और किशोरों के विकास के दौरान पौष्टिक खानपान और पर्याप्त नींद पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।